वह समुद्र जिसे भारत भूल गया

“इस ग्रह को पृथ्वी कहना कितना अनुचित है, जबकि यह स्पष्ट रूप से महासागर है.” — आर्थर सी. क्लार्क

अगस्त 2026 में, भारत सरकार ने समुद्र मंथन की कथा के नाम पर ₹84,084 करोड़ की एक योजना को मंज़ूरी दी. इसके पीछे की असली कहानी तेल की नहीं, बल्कि इस बात की है कि उस जोखिम का बोझ कौन उठाए जिसे कोई अकेले लेना नहीं चाहता.
अर्थव्यवस्था और नीति
Author

सात्विक रामन

Published

August 2, 2026