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टैरिफ हथियार की वापसी
जब अमेरिका ने 2026 की शुरुआत में नए टैरिफ की घोषणा की, तो वैश्विक व्यापार प्रणाली में एक परिचित सा दृश्य था। ट्रम्प प्रशासन ने टैरिफ को आर्थिक नीति का केंद्रीय उपकरण बनाया था। भारत को भी इससे छूट नहीं मिली। स्टील, एल्युमीनियम और इलेक्ट्रॉनिक्स की कुछ श्रेणियों पर नए टैरिफ बाधाएं आईं।
भारत के लिए क्या दांव पर है
अमेरिका भारत के सबसे बड़े निर्यात साझेदारों में से एक है। दवाइयां, सॉफ्टवेयर सेवाएं, कपड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामान सभी अमेरिकी मांग पर काफी निर्भर हैं। दवाइयां एक विशेष रूप से दिलचस्प मामला है — भारत जेनेरिक दवाओं की एक बड़ी हिस्सेदारी अमेरिकी बाजार को देता है।
सकारात्मक पक्ष
टैरिफ युद्धों में एक बात: जब दो देश एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाते हैं, तो कभी-कभी तीसरा देश फायदा उठाता है। अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए टैरिफ भारतीय निर्माताओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली, कपड़ा और फर्नीचर में जगह खोल सकते हैं।
राजनयिक कला
भारत की प्रतिक्रिया सावधानीपूर्ण थी। जवाबी टैरिफ की जगह भारत ने शांत कूटनीति का रास्ता चुना। दोनों सरकारों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू की। 2026 में इन बातचीत का परिणाम आने वाले कई वर्षों के लिए भारत-अमेरिका संबंध की दिशा तय करेगा।