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परिचय
फरवरी 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस बार बजट बनाना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल है, घरेलू मांग में कुछ कमजोरी है और राजकोषीय अनुशासन की मांग भी है।
विकास बनाम राजकोषीय अनुशासन
सबसे बड़ा सवाल यह है: सरकार कितना खर्च करे? अधिक खर्च से विकास को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इससे राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है जिससे मुद्रास्फीति का खतरा हो। कम खर्च से राजकोषीय अनुशासन बनता है लेकिन विकास की गति धीमी हो सकती है।
रोजगार की चुनौती
भारत हर साल लगभग 1 करोड़ युवाओं को कार्यबल में जोड़ता है। इतने रोजगार पैदा करने के लिए क्या उपाय होंगे?
ग्रामीण अर्थव्यवस्था
2025 में मानसून अच्छा रहा, लेकिन ग्रामीण आय और शहरी आय के बीच खाई अभी भी बड़ी है। बजट में किसानों और ग्रामीण क्षेत्र के लिए क्या प्रावधान होंगे?
निष्कर्ष
2026 का बजट एक ऐसे मोड़ पर आ रहा है जहां सरकार को कई मोर्चों पर एक साथ संतुलन बनाना होगा। जो भी विकल्प चुने जाएं, वे अगले कई वर्षों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करेंगे।