Pageviews:
परिचय
होर्मुज़ जलसंधि ओमान और ईरान के बीच एक संकरा जल मार्ग है। इसकी चौड़ाई सबसे संकरे स्थान पर केवल 33 किलोमीटर है। फिर भी यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट है। सऊदी अरब, UAE, कुवैत, इराक और ईरान का तेल इसी जलसंधि से होकर गुजरता है। हर दिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल — दुनिया की आपूर्ति का 20 प्रतिशत।
ईरान की धमकी की असलियत
ईरान ने पिछले 40 वर्षों में दर्जनों बार जलसंधि बंद करने की धमकी दी है। लेकिन क्यों ईरान इसे बंद नहीं करता? क्योंकि ईरान खुद को बर्बाद कर देगा। ईरान का सारा तेल निर्यात भी इसी जलसंधि से होता है। जलसंधि बंद करने का मतलब है अपनी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा काट लेना।
भारत के लिए क्या दांव पर है
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। उसका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है — और होर्मुज़ से होकर गुजरता है। अगर जलसंधि कभी अवरुद्ध हो, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को तत्काल प्रभाव महसूस होगा। इसीलिए भारत मध्य पूर्व की स्थिरता में गहरी रुचि रखता है।
विकल्प क्या हैं
Saudi Aramco ने एक ओवरलैंड पाइपलाइन बनाई है जो होर्मुज़ को बायपास कर सकती है। UAE का Fujairah बंदरगाह होर्मुज़ के बाहर है। लेकिन ये विकल्प जलसंधि की क्षमता का केवल एक छोटा हिस्सा ही संभाल सकते हैं।
अंतिम विचार
होर्मुज़ जलसंधि भू-राजनीतिक अंतर-निर्भरता का एक क्लासिक उदाहरण है। ईरान के पास तकनीकी रूप से जलसंधि बंद करने की शक्ति है, लेकिन ऐसा करना उसके लिए भी आत्मघाती होगा। छात्रों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पाठ है: वास्तविक दुनिया में शक्ति अक्सर उतनी सरल नहीं होती जितनी दिखती है।