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परिचय
Ukraine में युद्ध ने दुनिया को कुछ अप्रत्याशित सिखाया: सस्ते, व्यावसायिक ड्रोन आधुनिक युद्धक्षेत्र पर बड़ी ताकत बन गए हैं। दोनों पक्षों ने हजारों ड्रोन तैनात किए। और दोनों पक्षों को जल्दी एहसास हुआ कि उन्हें उन ड्रोन को मार गिराने के तरीके भी चाहिए। एंटी-ड्रोन तकनीक की वैश्विक मांग अचानक बढ़ गई। भारत इस मांग को पूरा करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
ड्रोन युद्ध ने क्या बदला
Ukraine युद्ध से पहले, ड्रोन मुख्य रूप से बड़े, महंगे सैन्य प्लेटफार्म थे। Ukraine ने दिखाया कि DJI जैसे सस्ते व्यावसायिक ड्रोन को हथियार में बदला जा सकता है। इससे एंटी-ड्रोन सिस्टम की तत्काल जरूरत पैदा हुई — जैमर, लेजर, नेट गन और ड्रोन-विरोधी ड्रोन।
भारत की स्थिति
भारत ने 2016 में “Make in India” रक्षा नीति की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे एक घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र उभरा है। Bharat Electronics Limited (BEL), Tata Advanced Systems और कई छोटी कंपनियाँ अब एंटी-ड्रोन सिस्टम बना रही हैं। भारत ने 2025 में अर्मेनिया को एंटी-ड्रोन सिस्टम निर्यात करने की घोषणा की।
यह बड़ी तस्वीर का हिस्सा है
भारत ने 2025 तक 5 अरब डॉलर का रक्षा निर्यात लक्ष्य रखा था — जो 2017 में केवल 20 करोड़ डॉलर था। एंटी-ड्रोन तकनीक उस बड़ी महत्वाकांक्षा का एक हिस्सा है। भारत के लिए, यह सिर्फ राजस्व का मामला नहीं है। यह भू-राजनीतिक प्रभाव है।
अंतिम विचार
एंटी-ड्रोन सप्लायर के रूप में भारत का उदय इस बात की याद दिलाता है कि भू-राजनीतिक संकट नए आर्थिक अवसर कैसे पैदा करते हैं। छात्रों के लिए, यह इस बात की एक अच्छी मिसाल है कि कैसे एक देश दुनिया की जरूरतों से मेल खाती तकनीक में निवेश करके अपनी स्थिति बदल सकता है।