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परिचय
आपकी इलेक्ट्रिक कार, स्मार्टफोन, ईयरफोन, पवन टर्बाइन और अधिकांश आधुनिक हथियार प्रणालियाँ दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर निर्भर हैं। इन 17 तत्वों का उपयोग शक्तिशाली स्थायी चुम्बक बनाने में होता है जो इलेक्ट्रिक मोटर के लिए आवश्यक हैं। और सबसे असहज सच: चीन दुनिया की 90 प्रतिशत आपूर्ति का खनन, प्रसंस्करण और शोधन करता है। 2025 में, चीन ने इन सामग्रियों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना शुरू किया — आंशिक रूप से अमेरिकी टैरिफ के जवाब में।
दुर्लभ पृथ्वी चुम्बक क्या हैं और वे क्यों मायने रखते हैं
EV में उपयोग होने वाले NdFeB चुम्बक (नियोडिमियम-आयरन-बोरान) अब तक उपलब्ध सबसे शक्तिशाली स्थायी चुम्बक हैं। एक छोटा NdFeB चुम्बक अपने वजन से सैकड़ों गुना ज्यादा भार संभाल सकता है। हर Tata Nexon EV, हर Ola Electric स्कूटर इन चुम्बकों पर निर्भर है।
चीन क्यों हावी है
चीन ने 1990 के दशक में एक रणनीतिक निर्णय लेकर दुर्लभ पृथ्वी उद्योग विकसित किया। भारी सब्सिडी और सरकारी समर्थन से। अन्य देशों के पास भंडार थे लेकिन चीन की कीमतों से मुकाबला नहीं हो सका।
भारत का जवाब
भारत के पास खुद भी दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के महत्वपूर्ण भंडार हैं — पूर्वी और दक्षिणी तट पर मोनाजाइट रेत। लेकिन भारत ने कच्चे अयस्क को उपयोगी चुम्बकों में बदलने की क्षमता नहीं बनाई है। अब सरकार इस क्षमता को विकसित करने पर जोर दे रही है।
अंतिम विचार
दुर्लभ पृथ्वी की कहानी इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि आधुनिक भू-राजनीति में आपूर्ति श्रृंखलाएँ क्यों मायने रखती हैं। छात्रों के लिए, यह रणनीतिक सोच में एक महत्वपूर्ण सबक है: सबसे शक्तिशाली आर्थिक उत्तोलन अक्सर उन सामग्रियों को नियंत्रित करने से आता है जिनकी हर किसी को जरूरत है।