Pageviews:
परिचय
1962 से, भारत के परमाणु ऊर्जा अधिनियम ने परमाणु ऊर्जा को पूरी तरह सरकार के हाथ में रखा। मई 2025 में, सरकार ने Adani, L&T जैसी निजी कंपनियों और विदेशी कंपनियों को परमाणु संयंत्र बनाने की अनुमति देने के लिए इस कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया। लक्ष्य: 2047 तक भारत की परमाणु क्षमता में 12 गुना वृद्धि। यह भारत के इतिहास में ऊर्जा नीति का सबसे बड़ा बदलाव है।
अभी परमाणु ऊर्जा क्यों
भारत को बहुत अधिक बिजली चाहिए। सौर और पवन ऊर्जा अच्छी हैं लेकिन अनियमित हैं। कोयला विश्वसनीय है लेकिन प्रदूषणकारी है। परमाणु ऊर्जा अनूठी है: यह दिन-रात बड़ी मात्रा में स्वच्छ बिजली पैदा करती है, मौसम की परवाह किए बिना। भारत अभी अपनी बिजली का केवल 3 प्रतिशत परमाणु ऊर्जा से पाता है — France (70%), South Korea (30%), या अमेरिका (18%) से बहुत कम।
सरकार अकेले यह क्यों नहीं कर सकती
परमाणु संयंत्र बनाना महंगा और धीमा है। सरकारी NPCIL ने दशकों में बहुत कम क्षमता बनाई है। 2047 तक 100 GW तक पहुँचने के लिए निजी पूँजी और विशेषज्ञता जरूरी है।
निजी परमाणु के जोखिम
यह सरल निर्णय नहीं है। परमाणु ऊर्जा में अन्य ऊर्जा स्रोतों की तरह जोखिम नहीं है। सुरक्षा, कचरा प्रबंधन, और दुर्घटनाओं की संभावना के लिए कड़े नियम जरूरी हैं। लेकिन सरकार कहती है कि कड़ी निगरानी बनी रहेगी।
अंतिम विचार
भारत का परमाणु ऊर्जा खोलना भविष्य में एक साहसी दाँव है। छात्रों के लिए यह महत्वपूर्ण सवाल उठाता है: हम परमाणु ऊर्जा के जोखिमों और लाभों को कैसे तौलते हैं? खतरनाक तकनीक के प्रबंधन में निजी कंपनियों की क्या भूमिका होनी चाहिए?